बस पूछता हूँ 

क्या मेरी पहली कविता का कोई 

गीत बनोगी? 

जो मन के रास्ते आत्मा तक जाता हो

जो सिर्फ मुझको ही गाता हो

क्या तुम वो गंगा बनोगी? 

जो पर्वतों को छोड़कर 

आती हो मुझ तक! 

जानकर भी कि मैं खारा हूँ 

क्या तुम वो राधा बनोगी? 

बेशक मैं तन से रुक्मिणी का हो गया

पर मेरे मन से तुम न गयी

क्या तुम अब भी वो मीरा बनोगी? 

जो गोपियों से, राधा से, रुक्मिणी से इतर

मुझको ही सब कुछ मान बैठी!! 

कब से राह देख रहा हूँ? 

तुम्हारे जवाब का? 

~गौतम @gautam0112