छोड़ कर डाल उड़ गया वो पंछी
नये ठिकाने की आस में
नई राह, नई मंजिल
और नये लोगों की तलाश में
दरअसल उड़ना पसंद है उसे
तो वो जल्दी थकता नहीं है
राह में पड़े ठिकाने और दाने देख
दिल उसका मचलता नहीं है
हताश होता है
तो बैठ जाता है
इधर उधर के नजारे देख
फिर उड़ जाता है
पर तेज हवाओं की मार से
पंख उसके थकते नहीं
कड़ी धूप के वार से
हौसले कभी उखड़ते नहीं
डालें भी बहुत मिलती हैं
लोग भी बहुत मिलते हैं
पर वो सुविधाओं के लालच में
कभी कहीं रुकता नहीं
क्योंकि पता है उसे
अगर वो अब रुक गया
तो पर उसके शिथिल पड़ जाएंगे
और अगर पर पड़ गये शिथिल
तो न तो वो हौसला रहेगा
और न ही रहेगी कोई इच्छा
बस पड़े पड़े उसी आबो-हवा में
लाचार हो मौत की राह देखेगा
की कब कोई भक्षी आये
और ये प्राण ले जाये।
उसे आभास है उस लाचारी का
जिसे उसने बरसों से देखा है
कितना कष्टदायी होता है
एक डाल पर बैठे बैठे
मौत की राह तकना
काम के नशे में धुत अगर जान जाये
तो उससे बड़ा सौभाग्यवान कोई नहीं
इसीलिए वो बस उड़ता रहता है
नये ठिकाने की आस में
नयी राह, नयी मंजिल
और नये लोंगो की तलाश में।