वाह
मुझे पार नदी को करना है,
आप पहाड़ चढ़ना सिखा रहे हो।
मुझे रास्ता लंबा तय करना है,
आप छोटा रास्ता दिखा रहे हो।
माना कि तजुर्बा ज़्यादा है आपकी
समझ में दुनियादारी का,
पर ये खेल भी तो शतरंज का नही है,
जो पुरानी चाल हर मंजिल को मात दे दे।
और रास्ता भी मेरा वो नही,
जो सलाह आपकी हर मोड़ पर साथ दे दे।
मैं कोई बगावत नही कर रहा हूं
ना ही विचार है मेरा आपको गलत ठहराने का
बस चाहता हूं इतना
जो रास्ता में तय कर रहा हूं
मुझे उसका ज्ञान ग्रहण करने दो।
क्या पता लग जाए समय
या भटक जाऊं मैं मंजिल से
पर मुझे मेरा रास्ता तय करने दो।
~गौरव