प्यादा बन खेल रहा है
जिस खेल का राजा है वो
जिस दिन पहचान गया खुद को
खेल के नियम ही बदल जायेंगे।
अभी लड़खड़ा कर चल रहा है
क्योकि चलना है उसे बहुत
जिस दिन समझ गया मंजिल को
मंजिल के मायने ही बदल जाएंगे।
परिस्थितियां अभी कठिन है थोड़ी
समय से विपरीत चलना है
जिस दिन टक्कर देखा बहाव को
पांव खुदबखुद पाषाण बन जाएंगे।