टूटा हुआ था मैं तिनकों के समान आप ही तो थे जिन्होंने कंधो पर उठा मुझे सारा संसार घुमाया था, बेजान था मैं कोमल फूलों की पत्ती जैसा आप ही तो थे जिन्होंने उंगली पकड़ मुझे चलना सीखाया था, अपनी जरूरतों को परे कर मेरी हर ख्वाहिश को पूरा किया आप ही तो थे जो थके हारे रात को मेरे लिए मिठाईया लाते थे आप ही तो थे जो पत्थर पर सो हमें नरम गद्दे पर सुलाते थे आप ही तो थे जो नित नये खिलोने हमें दिलाते थे बड़ा हो गया हूं मैं ज़िन्दगी के हर मोड़ पे आपका साथ कम हो गया है पर आपका हाथ सर पर अब भी अच्छा लगता है बातें बेशक कम हो हम दोनों में पर पापा जब कभी आपका फोन आता है ना दिल को काफी अच्छा लगता है।