एक रोज रंगमंच के बाद
एक सवाली तीर ने मन को घेरा
और मौका देख
हमने गुमसुम बैठे हँसमुख पर छोड़ा-
अपनी बातों से हमको कितना हँसाते हो
सच बताओ इतने किस्से कहा से तुम लाते हो ?
सुन इतना हँसमुख के नयनों से मोती छूट गए
वो राज छुपा न पाया और हम भी चुप से हो गए ..
(हँसमुख का जवाब)
मेरे किस्से सुनकर
मेरी कलाकारी की दाद देते हो
मैं नाकामियां सुना
मन हल्का करता हूँ
तुम लतीफे मानते हो
हँस लेते हो


