
एक रोज रंगमंच के बाद
एक सवाली तीर ने मन को घेरा
और मौका देख
हमने गुमसुम बैठे हँसमुख पर छोड़ा-
अपनी बातों से हमको कितना हँसाते हो
सच बताओ इतने किस्से कहा से तुम लाते हो ?
सुन इतना हँसमुख के नयनो
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एक रोज रंगमंच के बाद
एक सवाली तीर ने मन को घेरा
और मौका देख
हमने गुमसुम बैठे हँसमुख पर छोड़ा-
अपनी बातों से हमको कितना हँसाते हो
सच बताओ इतने किस्से कहा से तुम लाते हो ?
सुन इतना हँसमुख के नयनो