मालूम था वो शक्स मेरा जीना दुश्वार करेगा।

वो अपनी निगाहों से हर रोज़ बेक़रार करेगा।


उसकी आँखें तो हैं जैसे समंदर हुस्न का,

कौन अपनी कश्ती ले कनारे इंतेज़ार करेगा।


आएगा लौट कर वही आँखों का मंज़र सामने,

उसका पलट कर ना देखना ज़ार-ज़ार करेगा।


वो बेख़बर है क़ातिलों में शुमार है उसका,

वो अपनी नज़रों से गुनाह बार-बार करेगा।


तुम भूलना चाहोगे उसे “अलट” वो याद आता रहेगा,

हर रिहाई की कोशिश पे ज़्यादा गिरफ़्तार करेगा।


- अलट