बारिश और तुम
भीगी हुई पत्तियों से ओस कतरों का गिरना,
ये सावन का मौसम, उसपे तुम्हारा संवरना,
भीगी हुई ज़ुल्फ़ों से अटकी बूँदों को झटकना,
वो बारिश में चुपके हमारा-तुम्हारा मिलना,
इस बरसात हमारी दास्ताँ लेकिन रही गुम
बारिश और तुम
- अलट


बारिश और तुम
भीगी हुई पत्तियों से ओस कतरों का गिरना,
ये सावन का मौसम, उसपे तुम्हारा संवरना,
भीगी हुई ज़ुल्फ़ों से अटकी बूँदों को झटकना,
वो बारिश में चुपके हमारा-तुम्हारा मिलना,
इस बरसात हमारी दास्ताँ लेकिन रही गुम
बारिश और तुम
- अलट