क्यों नींद नहीं आती ?

क्यों अंदर ही चिलाता हूं, जोर से 

जब बाहर भागता हूं, शोर से।

क्यों नींद नहीं आती ?

क्यों अंदर इतना डर जाता हूं 

जब बाहर से सब को डरा देता हूं ।

क्यों नींद नहीं आती ?

क्यों खुद से इतनी नफरत करता हूं 

जब बाहर सबको प्यार करता हूं ।

क्यों नींद नहीं आती ?

क्यों खुद को इतनी तकलीफ देता हूं 

जब बाहर सब को खुश रखता हूं ।

क्यों नींद नहीं आती ?

क्यों अंदर इतने पहाड़ चढ़ जाता हूं

जब बाहर दुनिया से घबराता हूं ।

क्यों नींद नहीं आती ?

क्यों अंदर ही कोस देता हूं खुद को 

जब बाहर ओस से धुंधला जाता हूं ।

क्यों नींद नहीं आती ?

क्यों खुद को समझा नहीं पाता 

जब बाहर सबको समझता हूं ।

क्यों नींद नहीं आती ?

क्यों खुद को दूर कर देता हूं 

जब बाहर को अंदर लेटा हूं ।

क्यों नींद नहीं आती ?

क्यों अंदर सब सच कह देता हूं,

जब बाहर झूठ बोल देता हूं ।

क्यों नींद नहीं आती ?

क्यों अंदर से मर जाता हूं,

जब बाहर से सब को जताता हूं ।

क्यों नींद नहीं आती ?

क्यों खुद को दो बतात हूं , 

जब अंदर एक मैं में मैं को छिपाता हूं ।