तुम्हारी छोटी सी मोहब्बत का, तलबगार हूँ मैं

तुम से कुछ और जो माँगू तो गुनहगार हूँ मैं


मेरे इजहार कि यह एक-सौ-आँठवीं अर्ज़ी

कर लो मंज़ूर कि बेकारी से बेज़ार हूँ मैं


बेवफ़ा न बनूँ और न बनूँगा पागल

अपने दिल का बाबू बना लो मुझे बेकार हूँ मैं

..!!!तुम्हारी छोटी सी..!!


मैंने कुछ घास नहीं काटी, किया तुझसे प्यार ,

हो समझदार, समझ लो कि आशिक़ हूँ मैं|


खेल सब देखे हैं, कप्तान हूँ मैं,

तुम्हे अपना बनाने को तैयार हूँ मैं|

शगुनहाँ जो हो जाओ तुम मेरी तो, वो स्‍वप्‍न सच्चा है||

..!!!तुम्हारी छोटी सी..!!


गौरव कुमार खेड़ावत