राम हूँ मैं प्रकाश हूँ मैं

शबरी का जूठा बेर और क़ेवट की नाव भी हूँ मैं

राम हूँ मैं प्रकाश हूँ मैं

शबरी का जूठा बेर और क़ेवट की नाव भी हूँ मैं


रावण का ज्ञान हूँ बलि की शक्ति हूँ मैं

भरत का प्रेम और हनुमान की भक्ति भी हूँ मैं


मंदिर की सुंदर मूर्त हूँ मैं

हज़ारों आशाओं का भरोसा हूँ मैं


आज एक उदघोश हूँ मैं

हुंकार भर रही भीड़ की गूँज हूँ मैं

मनुष्यों को आज डरा भी रहा हूँ मैं


आज एक उदघोश हूँ मैं

हुंकार भर रही भीड़ की गूँज हूँ मैं

मनुष्यों को आज डरा भी रहा हूँ मैं


एक नया रण सजा देख रहा हूँ मैं

राम हूँ, राम के अवतरित होने की प्रार्थना कर रहा हूँ मैं