कोरोना से करुणा's image
705K

कोरोना से करुणा

देखें जो सपने बड़े बड़े

हैं यूं शांत क्यों पड़े पड़े

जो कहते चांद पर जाएंगे

कि स्वर्ण वहां से लाएंगे

मंगल का कर माप तौल

मानव वहां बसाएंगे।


 जो है सुदृढ, संपन्न, और अनुशासित

 कहते खुद को जो विकसित

 अब क्यों काप रहे थर थर

 लेकर तकनीकी का साथ

 जो करते थे विज्ञान की बात

 बेहतर से बेहतर बनायेगे 

 अब से हम धरती चलाएंगे।

 

 तब फिर प्रारंभ हुआ दोहन

 हुआ वसुधा का चीर हरण

 जग को दिखाने खोखला विकास

 रत्नगर्भा पर चला टिकास

  

 कट गए हजारों लाखों वन

 बनाया कांक्रीट का कानन

 और बढ़ा मानव साहस

 करने लगा वो दुस्साहस

 बढ़ गई जीव हत्या

 और काप उठा रोहन।

 

 तिस पर प्रकृति खूब रोई

 गौरव उपाय करो कोई

 मैंने पहले बनाई अवनी

 फिर सृजित करी धवनी

 ध्वनि ने बनाया जीवन

 जीव,जंतु,पेड़ और तन।

 

 मन तो अब भी था अधीर

 के रचू कुछ ऐसा शरीर

 जो मुझे प्यार कर पाएगा

 नित नित शीश नवाएगा

 दूं अपनी अनमोल कृति

 बुद्धि जिससे वो मानव कहलायेगा।

 

 

 

 

<
Read More! Earn More! Learn More!