ये चंद घड़ियाँ बादल है गर
बरस गए तो वापस नही आयेंगे
इन लम्हों को सँभाल कर रखो
ये पंछी है गर उड़ गए तो
बसेरा कहीं और लेंगे
अपने अच्छे दिनों को
अपनी जेब मे महफ़ूज़ रखो
गर कट गयी जेब तो ये
किसी और के हो जायेगे
अभय ‘अवधी’
USA
ये चंद घड़ियाँ बादल है गर
बरस गए तो वापस नही आयेंगे
इन लम्हों को सँभाल कर रखो
ये पंछी है गर उड़ गए तो
बसेरा कहीं और लेंगे
अपने अच्छे दिनों को
अपनी जेब मे महफ़ूज़ रखो
गर कट गयी जेब तो ये
किसी और के हो जायेगे
अभय ‘अवधी’
USA