मुझे ख़ौफ़ है कि:
इस युग में आदमी के पास सब कुछ होगा सिवाय इंसानियत के
रिहाइश बड़ी होगी पर उसमें वापसी की ख्वाहिश
छोटी होगी
नाती पोते पोती अपने नाना-नानी, बाबा दादी को
कहानियों में नहीं। कुछ धुँधली सी तस्वीरों में ढूँढेंगे
लोग दुनिया के हर कोने में होंगे पर अपने हमसाया का नाम न जानेंगे
हर शख़्स दुनिया को एक ही लेंस से देखेगा
पर अपनी आत्मा को न समझेगा
अभय ‘अवधी’
