रेत की बुनियाद पर सहन नहीं बनते
और कपड़ो से किरदार नहीं बनते
पैराहने- हस्ती को लिबास की ज़रूरत नहीं
वस्त्र जिस्म तो ढकते
मगर इंसान नहीं ढकते
संघर्ष ही ख़ुद्दारी की बुनियाद है ,
बग़ैर ख़ुद्दारी के इंसान नहीं बनते
जीवन की पाठशाला में पढ़ते हैं सभी
बुराइयों से जो टकराये हैं वही इंसान बनते
जिनमें है हुनर हौसला अफ़ज़ाई का
वो ही इंसानियत की मिसाल बनते
जज़्बा जिनमें है तारीकी से लड़ने का,
दुनिया से अँधेरा मिटाने का
वो ही चिराग़ों की लौ होते हैं
अभय ‘अवधी’
USA
