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इंतज़ार


कभी झील में रात को चाँद का अक्स देखा हैइक बेहद ख़ूबसूरत मुजस्समा लगता है

कभी लहरों के आग़ोश मे छुपता है तो कभी साहिल से लिपट जाता हैइस कश्मकश मे भी हर शब झील को चाँद का इंतज़ार रहता है

अभय ‘अवधी’USA

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