हुनरबाज
पहाड़ों से न पूछो उनका हुनर
सिर्फ़ दरिया ही से पूछो पहाड़ों का हुनर
दरिया सिमटता है समंदर में तो
फिर समंदर से न पूछो उसका हुनर
मौजें मुसलसल टकरातीं हैं साहिल से
तो फिर न पूछो साहिल से उसका सबर
सफ़ीना जब डगमगाए है समंदर में
पतवार ही बचाये है उसे
तो न पूछो पतवार से उसका हुनर
अभय ‘अवधी’
