इस खामोश शहर की रौनक में,

खुद को ढूंढते से कुछ ख्वाबों के घुँघरू ।। 

वक़्त बेवक़्त इस रौशनी की चमक में,

खुद को बहलाते से जुगनू ।।

खुद को पा लेने और खुद को रौशन कर देने की चाह में ,

खुद से मेहफ़ूज़ होकर खुद से ही होते रूबरू।।