है पूरा जुड़ा तो कोई नहीं,

हम सब थोड़े से टूटे हैं |

कुछ ग़म है अपने साथ लिए,

और कुछ जो पीछे छूटे हैं |


हर दिल में कोई दास्ताँ,

जो लबों तक आकर रुकी सी है |

कुछ धुंधली-धुंधली यादें हैं,

आँखों में जो छुपी सी हैं |


हैं दिल पर छाले ताज़े से,

जज़्बात भी हैं लहू-लुहान |

थक-हार के बैठे डाली पे,

भूल गए ऊंची उड़ान |


तो क्या गर हम टूटे हैं,

दिल आज भी एक परिंदा है |

गिर-गिर कर भी उठते हैं,

हौसले हमारे ज़िंदा हैं |


है पूरा जुड़ा तो कोई नहीं,

हम सब थोड़े से टूटे हैं |

कुछ ग़म है अपने साथ लिए,

और कुछ जो पीछे छूटे हैं |