इक कच्चा धागा तेरे पास,

इक अधूरी कहानी मेरे पास,

चल इन दोनों को सीते हैं,

इक पूरी कहानी बुनते हैं। 


न शिकवा तुझको खुद से है,

न मुझे शिकायत रब से है ।

कुछ तेरी दुआ, कुछ मेरी दुआ,

चल नई इबादत रचते हैं ।


तू कुछ अलफ़ाज़ ले आना,

इक धुन मैं लेकर आती हूँ,

अपने सुर, अपनी साज़ से

चल नया तराना गाते हैं 


कुछ बिखरा था कुछ टूट गया,

जो माज़ी था वो छूट गया |

हुआ भटकना बहुत अभी,

चल रुकते हैं, चल बसते हैं |