वो जो देखा तुमको पहली दफ़ा़

दिल मुस्कराया, होंठ मुस्कराये

पलकें उठीं, नज़रें मिलीं

तुम शरमाये, हम शरमाये

शरमाकर दौड़े, हंसकर पलटे

फिर नज़रों के नज़दीक आये

सिलसिला यूँ ही चलता रहा

दूर जाकर भी और पास आये

कम्बख्त वक़्त भी कितना तेज़ी से बदला

कि अंजाम-ए-मोहब्बत से पहले ही दिल तोड़ आये

मगर दिल भी ज़िद्दी था इक़रार के लिए

तो उनको अपने दिलों-ख़्वाबों में ले आये

दिल को रुसबा किया उनको यह बताकर

कि बिन आपने नींद-चैन ना आये

बोले,'ख़्वाब बन गए हो तुम भी' हमारे लिए

चाहो तो फ़िर दिलों-दिमाग़ में उतर जायें

एतबार-ए-मोहब्बत का फ़िर यूँ जगा

कि मोहब्बत को अंज़ाम तक पहुँचा आये