जाना है तुज़े बहुत दूर...
है डगर नही आसान...
लड़ना है तुज़े बादलो से...
छूना है तुज़े सपनो का आसमान...
मत बैठ तू हारकर...
बना आशियाना तिनका तिनका जोड़कर...
इन आँसुओ को तू ना बहा...
चूमेगा कदम एक दिन सारा जहाँ...
पाना है मंज़िल ख़ाले तू कसम...
अकेले ही चलना है सहले तू हर सितम...
पर्वतो की तरह रख मजबूत इरादा...
बनना है तुज़े अपने सपनो का शहज़ादा...