मैं उसे जानता नहीं हूं, मैं उसे जीता हूं।
मैं उसे जानता नहीं हूं, मैं उसे जीने का प्रयास करता हूं।
कभी - कभी लगता है कि जानता हूं लेकिन मैं उसे जानता नहीं,
मैं उसे जानता नहीं हूं।

मैं मान भी लूं कि उसे जानता हूं तब भी मैं उसे नहीं जानता,
मैं कह दूं के उसे नहीं जानता हूं , फिर भी मैं उसे नहीं जानता हूं,
वो है लेकिन मैं उसे नहीं जानता हूं,
वो नहीं है लेकिन मैं उसे नहीं जानता हूं।

ये ज़बान सबूत है होने का ,
जो है ही उसे क्यूं खोने का ,
हूं भ्रम में भ्रमणता मैं ,
यथार्थ से मेरा बैर ,
उसका ना होना जीवन का ना होना है,
काफी सरल है , विरल है, शीश दिऐ मिलता है ,
तेज प्रज्वलित जलकर मिलता है ,
संशय करता रहता है,
वो एक ही है जो सब में समान दिखाई देता है।