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सागर का एक किनारा हूं।

तेरी आँखों के नयनद्वीप का, मैं जगमग एक सितारा हूँ,
तू शीतलता की एक रोशनी-सी, मैं सागर का एक किनारा हूँ।।
सोचता हूँ तुझको हर-पल, देखता हूँ तुझको हर-पल,
जाऊँ कहीं, देखूँ वही, सोचूँ कहीं, मिलूँ  वहीं, और तुझे पढ़ता, बेवक़्त सारा हूँ,
अब तू किसी हीर-सी मुझे लगने लगी, मैं एक राँझा आवारा हूँ।।
मैं सागर का एक किनारा हूँ, मैं सागर का एक किनारा हूँ।।1।।

वह जो तुम्हारा रूप था, मेरी ज़िन्दगी का धूप था,
कैसे यकीं दिलाऊँ तुम्हें, वह किसका स्वरूप था।
ना असरार था, ना टकरार था, बस इश्क़ का गुलज़ार था,
तुम्हारी रेशमी जुल्फे, और वो कान की बाली,
ये हाथों के कंगन, और वो होठों की लाली,
था समय उस रोज,जब इन्हें, भी मैं सँवारा हूँ
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