रंगो के त्योहार में हमें भी यूं एक धोखा पड़ गया
उसके असली रंगो को देखने का मौका पड़ गया
सोचा था नही खेलेंगे हम होली इस रोज़ यहां अब
घर से चले तो रास्ते में तेरे घर का चौखा पड़ गया
वो रंग गुलाल भी आज बहुत खुशनसीब हो गया
जब उसके ऊपर तेरी जुल्फों का झोंका पड़ गया
सरहद पर याद करता है माँ को होली पे वो जवान
पर बीच में भारत माँ की रक्षा का न्योता पड़ गया
क्यू आज होली के दिन भी शेर लिख रहा है गगन
इक तिरे ना होने से होली का रंग फीका पड़ गया
- गगन माहेश्वरी


