हां !  मैं ही वो शक्स हुं जिसने कभी मोहब्बत की दीवार को फ्लांगा तक नहीं था, लेकिन जब से तुमसे बात किया है मैंने, ये जान लिया हैं कि मोहब्बत को किसी भी शय की जरूरत नहीं होती___ !

                ये तो दो दिलों के जज़्बात होते हैं जो एक दूसरे के लफ़्ज़ों के वज़न से मोहब्बत के तराजू के दोनों पलड़ों को एक साथ दोनों तरफ झुका देते हैं और तब शायद यह तराजू कुछ भी मापने या तोलने के लायक नहीं बचता!

      तुमसे बात करने के बाद ये इल्म हुआ कि सुकून क्या होता हैं, तुम्हारी आंखों की गहराई और लबों की खामोशी ने मुझे ऐसे रास्ते निकालने को मजबुर कर दिया कि मैं तुम्हारी ज़ुबान ना जानकर भी तुमसे बात कर पा रहा हुं____ देखो ना मै आज तक कभी भी ख़ुद के कामों के लिए इंतज़ार नहीं किया और अब हालात ऐसी है कि तुमसे बात करने को बेताब रहता हुं।

      हर मुल्क की सरहदें हर रोज़ ना जाने कितने लोगों की ख्वाहिशों को महदुद कर देती हैं लेकिन तुम्हारे और मेरे जज़्बात ने मिलकर हम दोनों के मुल्क की सरहदों को ला_महदुद  कर दिया ___जब तुमने बताया कि तुम्हारे दिल के भी वही हालात हैं जो मेरे हैं तब मोहब्बत को ला_महदूद कहने में मुझे थोड़ी भी देर ना लगी। 

    मोहब्बत तो उस पेड़ - पौधों के बीज की तरह हैं जिसे इस बात से कुछ भी फर्क नहीं पड़ता कि उसे पानी देने वाला किस मज़हब का मानने वाला या किस मुल्क का रहने वाला है। जैसे बीज को सिर्फ और सिर्फ पानी की जरूरत होती है वैसे ही मोहब्बत को सिर्फ खुलूस नियत और एहसास की जरूरत होती है।।