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सरहद पार की मोहब्बत

हां !  मैं ही वो शक्स हुं जिसने कभी मोहब्बत की दीवार को फ्लांगा तक नहीं था, लेकिन जब से तुमसे बात किया है मैंने, ये जान लिया हैं कि मोहब्बत को किसी भी शय की जरूरत नहीं होती___ !

                ये तो दो दिलों के जज़्बात होते हैं जो एक दूसरे के लफ़्ज़ों के वज़न से मोहब्बत के तराजू के दोनों पलड़ों को एक साथ दोनों तरफ झुका देते हैं और तब शायद यह तराजू कुछ भी मापने या तोलने के लायक नहीं बचता!

      तुमसे बात करने के बाद ये इल्म हुआ कि सुकून क्या होता हैं, तुम्हारी आंखों की गहराई और लबों की खामोशी ने मुझे ऐसे रास्ते निकालने को मजबुर कर दिया कि मैं तुम्हारी ज़ुबान ना जानकर भी तुमसे बात कर पा रहा हुं____ देखो ना मै आज तक कभी भी ख़ुद के कामों के लिए इ

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