
माँ मैं डर गयी हुँ इस ज़माने से,
ये नहीं मानेंगे मनाने से,
मैं तो बच्ची हुँ बस हंसना आता है मुझे,
आ जाती हुँ मैं बस हंस के बुलाने से,
माँ मैं डर गयी हुँ...
खुदा से चाहती हुँ मैं ये पूछना,
क्या फ़ायदा है बेटीयाँ बनाने से,
क्यों नहीं बनाया लड़का हमें भी,
क्या मिला खुद को हमें आज़माने से,
माँ मैं डर गयी हुँ.....
ये तो मर्द हैं जी चाहेगा कुछ भी करेंगे,
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