हर इंसान ज़िन्दगी को अपने अपने नज़ारिये से देखकर राय देता है और ज़िन्दगी को बसर करने की सलाह भी देता है |
कोई भी इंसान ये नहीं चाहता की मेरी तरह, मेरी आने वाली नसल की ज़िन्दगी बसर हो, हर किसी की यही ख्वाहिश होती है कि उसकी आने वाली नसल उससे ज्यादा अच्छी ज़िन्दगी बसर करे और आने वाली नसल की ज़िन्दगी को आबाद करने की ख्वाहिश और जाददो-जहद मे वह अपनी भी ज़िन्दगी को आज़ाब बना लेता है और खुदावंद से भी बहुत दुर निकाल जाता है |
लेकिन इंसान हमेशा ही ये भूल जाता है कि खुदा ने इस जहाँ मे बहुत तरह की मखलूक को पैदा किया है, जनावर, पेड-पौधे, और ना जाने कैसे कैसे मखलूक को ज़िन्हे हम खुली आँखो से देख भी नहीं सकते और उसको भी खुदा रिज्क देता है |
तो फिर क्यु इंसानी मखलूक अपनी रिज्क की खतिर उस खुदावंद को भी भूल जाता है ...??
उसने तो वादा किया है कि वह हर किसी को रिज्क देगा बस शर्त ये रखी, कि उसकी मखलूक उसकी इबादात करे और अपनी रिज्क की खातिर मेहनत भी करे ||
गुलशेर अहमद


