खामोश साथ
कहते हैं वो की हम उन्हे, हैं समझ नही पाते !
परेशानियों में उनकी, है नहीं हम घुले जाते !!
तकलीफ में हैं वो, अगर्चे रहते खुश हैं हम!
समझेंगे उनका दर्द, मिलेंगे जब हमे भी गम!!
ऐ खुदा, हमको भी दिया होता वो हुनर!
बातें बनाते, रो के दिखाते, जैसे हम पे रही हो गुज़र!!खामोश साथ का, सफर में कौन समझे मोल!
वो साथ ही क्या, बातों से जो, जाये न नापा तोल!!
वाकिफ हैं हम, है उनको, सुकून-ए-दिल की वो हसरत!
मिलती नही जो उनको, है कम्बख्त ये किस्मत!!
शायद वो समझें अब मेरे जज़्बात की नीयत!के जंग मे हार के रोना, हमारी है नही फितरत!!


