जीवन मे मिली मुश्किलों से, मायूस गर जो तुम हुए

उम्मीद के दामन को छोड़, मझधार मे जो तुम बहे ज़िन्दगी के वरदान को, तुम श्राप मे दोगे बदल

किसी और से, नही तुम करोगे, खुद से करोगे, बस तुम ये छल


कठिनाईयों से है भरा, संघर्ष जीवन का मगर

कर्तव्य है राही का वो, पूरा करे अपना सफर

हँसते हुए जीवन जियो, चाहत न रखो अन्त की

अन्त सबको ही मिलेगा, रचना है ये अनंत की


आगे बढ़ो, उठ के लड़ो, नही हो किसी से बस, तुम भी कम

हारो या जीतो, फिक्र क्या, दिखला दो तुम मे भी है दम

जीवन मिला है बस एक ही, जाने न दो तुम इसको व्यर्थ

जीवन को जी के ही, है सम्भव, दे पाना इसको, सम्पूर्ण अर्थ