जन्म के साथ जब अस्तित्व का प्रारम्भ हुआ,या फिर तभी हुआ अन्त का आरम्भ?
चेहरों की इस भीड का मै चेहरा हुं?या फिर कइ मोहरों के बीच मैं भी एक मोहरा हुं?
एक अन्तिम से चली मेरी जीन्दगी क्या दुसर अन्तिम पायेगी?और, कहां - कीतना - कब - रुकेगी, कीसे पता?
ईस पल हुं उस पल नही की क्षणभंगुरता,क्या यहि जीवन का सत्य है?या फिर कुछ और भी है?
जीवन्-मृत्यु के अनन्त रास के मध्य में मैं अडी हुं,अनुत्तरिनत प्रश्नों के उत्तर की खोज में अनवरत, अविराम ...


