आंखों ने खज़ान  

 


 

जमा किया है 

दरिया की मौजों का 

पहाडों की करवटों का 

पत्तियों की बौछारों का 

समंदर की खामोशी का 

सूरज की असूदगी का 

रास्तों की परछाइयों का 

झरनों की हरकतों का 

आसमान के नायाब रंगों का 

बर्फ की फूआरों का 

झीलों की नग़मगी    का 

फूलों की मुस्कुराहट का 

 

ग़मो का पैमाना  

छलका है जब भी 

किसी हसीन मंज़ ने 

हल्के से हाथ थामा है मेरा  

मुझे और अमीर  

बहुत अमीर होना है 

बस यही मक़स है 

दरंा