खौफ़ में लिपटी बदहवास रात  

चीखों से गूंजती अनाथ रात 

दहशतगर्द हैं सड़कों की रोनक़ 

लहू में नहाई खौफ़नाक रात  

अंधेरा है हद ए निगाह के भी आगे 

नारों की जंग है ये डर की रात 

सवेरे पर पहरा लगाए बैठा है जानवर  

जोश ए जुनून के सहारे है लाचार रात 

उजालों से गुरेज़ है इक हुक्मरान को 

नाकामी के तख्त पर है आवारा रात