Poetry 1 min read 479.7K reads

ye barish aur tum


बारिश की इन बूंदो ने मुझे निखारना शुरू कर दिया है ,सरफ दर सरफ चला मैं अपनी कश्तियो की ओर,

इन बूंदो ने मुझे सवारना शुरू कर दिया है ,मंजिल कुछ छुटी है टूटी नहीं ,फिर भी नयी मंजिलो को तराशना शुरू कर दिया है ,

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