Poetry 1 min read 473.4K reads

badla


इश्क़ मैं वो आबाद हुए पर क्या करे ग़ालिबहम भी कहानी और मुद्दत का सलीखा बदल कर ही जायेगे

तुम्हे नाज़ होगा अपनी दास्ता परपर ये सोच भी तुम्हारे शहर को बदल कर दिखलायेंगे

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