जब कोई नहीं था,
तब मैं था
आज सब कुछ तो है तुम्हारे पास,
सोहरत,
सफलता,
इज्जत,
मुहब्बत,
महफ़िल
और आज मैं इन सब के बीच में एक क़र्ज़ रूपी शून्य!
रात कटेगा
सूरज निकलेगा,
फिर मैं चमकूँगा अपने क़रमो से
देखना,
फिर जब कभी कोई नहीं होगा,
तब फिर मैं रहूँगा, तेरे साथ


