पंख अगर होते मेरे तो मे भी पंकज होता
दिन भर भरता उड़ान और रात को अपने घर होता
पंख अगर होते मेरे तो मे भी पंकज होता

खूब मस्ती फूल फर्राटा घूम घूम बादलों मे खो जाता
बुलट पर बैठ अपनी नगर एसे घूमता जैसे एक परिंदा हवा मे झूमता
जब मिस्ड काल होती 5 पप्पा की सीधे फैक्ट्री के दर होता 
पंख अगर होते मेरे तो मे भी पंकज होता

मै शर्मिला मै रसीला मै ही हर बैठक का खर्चीला 
टॉपिक जो भी चलता मेरे बिना जोक ना बनता 
यार कितने भी होते सबका सरपंच मे ही होता
पंख अगर होते मेरे तो मे भी पंकज होता!!