हो दूर अगर सनम कहीं तो
हमारी यादों का समय बाट रखना,
तन्हाई मे कहीं मेरी नज़्मों को याद करना
बरस रही वहां भी होंगी
यहां बरसी उन बूँदों को याद रखना,
थड़क रहे भीतर जो अल्फाज़ थे
सूनी सड़कों पे तन्हा चलते हुए कभी
उन अल्फाजों को याद करना
लिपटी होंगी वहां कई साख
से कुछ बूंदे
यहां पर भी बरसी उन बूँदों को याद रखना,
भिगो कभी बारिश मे अगर तो
बूँदों को आगोश मे भर
मेरे कांधे को याद करना
भूल जाओ ग़र तो
यहां बरसी इन बूँदों को याद करना
बरस के बन गयी जो बूंदे
तेरे कानो पे मोती
हाथों मे मोती लेके
उस मौसम को याद करना
माटी की सौंधी खुशबु की तरह जो था
वैसे अपने यौवन को याद करना
यहां जो बरसी थी कभी
उन बूंदों को याद रखना!


