रूखी - सूखी हवा मे
खिल रहे गिर रहे
तेसु के फूल
खूब पल्लवित वन की
बात कुछ और
इस निर्जन बंजर मे
रंग भर रहे तेसु के फूल
दूर कहीं अमिया प्रफुल्लित
हो आई है
आ रहा है कहीं से
लहरों का शोर
उलझन है या रहस्य कोई
बस चला जा रहा हूँ
उस ओर
सहद की है खुशबु कहीं
ले जा रहा है कोई चोर
पत्ते बिखरे पड़े है
किसके कदमों का है शोर
तेसु के फूल भी गिर गए
उड़ गए हर ओर!


