सुकून कहाँ है,

बचपन मे था क्या

जब दिन 

अलशायी आँखों से होता था

Interval डिब्बों की खुशबु से 

और climax माँ की गोद मे 

उसकी गोद मे जो था 

सुकून था क्या, 

पता नहीं अर्सा हो गया... 

या high school वाले 

पहले प्यार मे 

कहने से डरने पर ख़ाब सजाने मे 

सुकून था क्या 

शायद कह देना चाहिए था.... 

या सुकून मैदान मे था 

भागते-दौड़ते गिरते-पड़ते 

जिंदगी से दूर होकर, 

ज़िंदगी जीने मे सुकून था क्या 

अर्सा हो गया मैदान मे कदम नहीं रखा 

सुकून शाम को छत पे बैठे 

आसमान देखने मे है क्या 

हो सकता है 

सूरज दयावान लगता है 

थक जाता होगा सायद 

जाता होगा वह भी सुकून की तलाश मे, 

या अंधेरी रातों मे है सुकून 

जब मैं अपने साथ होता हू

खुद से बात करता हूं 

जो लगता है सुकून है 

हर बार अखिर मे खुद से पूछता हू 

सुकून कहां है?