बह रही है जहरीली हवा मेरे भी शहर में | टूट रही है जूझ रही हैं सांसे ! बच्चों और बुजुर्गों की मेरे भी शहर में | अब तो बेमौसम धुंधला दिखने लगा है मेरा शहर कभी ओढ़ने था चादर खूबसूरती की अब बदसूरत दिखने लगा है मेरा शहर। नालियां भरी है गंदगी से बस्तियां भरी है बीमारी से निकल जाता हूँ बचकर इन जगहों से बड़ी होशियारी से ! पर रह जाता हूँ ठगा आकर बाहर उन गलियों से। क्योंकि ! बह रही है.