आज सवेरे दिल बड़ा घबराया आंख खुली तो नेता जी को अपने चरणों में लेटा पाया नेताजी मंद मंद मुस्कुरा रहे थे मानो कह रहे चुनाव का मौसम लौट आया । नेताजी बढ़ा रहे मुझसे बहुत जान पहचान देखकर उनकी महिमा हो रहा मैं बड़ा हैरान लग रहा है ! चुनाव आने वाले हैं भाईजान ! नेताजी अब कुछ दिनों से मुझे ज्यादा जानने लगे है देखते ही मेरे चरण दबाने लगे साब क्या ? चुनाव आने लगे है ! नेताजी की दरबारी फौज करा रही रमुआ,कलुआ,ललुआ की मौज टहलते देखा बाजार में नेताजी बोले आओ देवा मौज उड़ाये तपाक से हम भी बोल पड़े नेताजी ! क्या चुनाव नजदीक आये ? नेताजी हर रोज घर की ! परिक्रमा करने लगे है पूछे 'देवा' एकई बात चचा क्या ? चुनाव आने लगे हैं !