हास्य कविता :- चुनाव आने वाले हैं क्या ?

आज सवेरे 
दिल बड़ा घबराया 
आंख खुली तो 
नेता जी को 
अपने चरणों में लेटा पाया 
नेताजी मंद मंद मुस्कुरा रहे थे 
मानो कह रहे 
चुनाव का मौसम लौट आया ।
नेताजी बढ़ा रहे 
मुझसे बहुत जान पहचान 
देखकर उनकी महिमा 
हो रहा मैं बड़ा हैरान 
लग रहा है !
चुनाव आने वाले हैं भाईजान ! 
नेताजी अब 
कुछ दिनों से 
मुझे ज्यादा जानने लगे है 
देखते ही 
मेरे चरण दबाने लगे 
 साब क्या ?
 चुनाव आने लगे है ! 
नेताजी की दरबारी फौज 
करा रही 
रमुआ,कलुआ,ललुआ की मौज 
टहलते देखा बाजार में 
नेताजी बोले 
आओ देवा मौज उड़ाये 
तपाक से हम भी बोल पड़े 
नेताजी !
क्या चुनाव नजदीक आये ?
नेताजी हर रोज 
घर की !
परिक्रमा करने लगे है 
पूछे 'देवा' एकई बात
चचा क्या ?
चुनाव आने लगे हैं !


- देवानंद राय