
जब बात इश्क़ की होती
तुम्हारी बात लाज़मी होती।
थोड़ा सा मैं हिचकिचाती
फिर कर होंसला सब बोल जाती।
वो पल में रूठना और मनाना
संग बैठ हँसना, मुस्कुराना।
चाँद तारों की बाते करना
और तुम्हारे ख्वाब संजोना।<
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जब बात इश्क़ की होती
तुम्हारी बात लाज़मी होती।
थोड़ा सा मैं हिचकिचाती
फिर कर होंसला सब बोल जाती।
वो पल में रूठना और मनाना
संग बैठ हँसना, मुस्कुराना।
चाँद तारों की बाते करना
और तुम्हारे ख्वाब संजोना।<