जब बात इश्क़ की होती

तुम्हारी बात लाज़मी होती।

थोड़ा सा मैं हिचकिचाती

फिर कर होंसला सब बोल जाती।

वो पल में रूठना और मनाना

संग बैठ हँसना, मुस्कुराना।

चाँद तारों की बाते करना

और तुम्हारे ख्वाब संजोना।

प्यार का वो पहला एहसास

जिसने मिटा दी हर प्यास।

हाथ जोड़ मैंने यही की अरदास

तुम रहो सदा मेरे आस पास।

मेरे हमराही, मेरे हमराज़,

तुमसे ही है दिल की सांझ।

मुझे था बस यही कहना

और यही कहूँगी हर बार।