बाहक़ मुद्दतो से रहा था जो मेरा।

बहकना करार दिया उसे हाकिम ने आज मेरा।।


आये और चली गयी बहुत सी हकूमते इस दौर में।

यू सांसो का हिसाब नही रखा गया किसी दौर में ।।


मिटाओगे मेरे नामों-निशान कर राख जज्ब मेरी किसी दरिया में।

लौट आऊंगा फिर बन किसी नाम का गुल खिलके इसी बगिया में।।