ज़िंदगी की इस भागदौड़ में,
लोग जैसे जीना भूल गए हैं।
अपने काम में ये,
जैसे अपनी आज़ादी खो बैठे हैं।
आज इस हवा की कुछ है बात,
दे रही एक सुकून का एहसास।
दिला रही उस बेफ़िक्री की याद,
आज का दिन होगा ख़ास।
भूल जाऊं मैं सारे काम,
बन जाऊं उस परिंदे के समान।
लूं खुली हवा में सांस,
उड़ जाऊं इस दुनिया से अनजान।
मैं हूं एक बहती नदी,
दुनिया की रस्मों में बांध लो मुझे।
मैं ना रुकूंगा कभी,
मुस्कुराता रहूंगा हमेशा,
मुस्कुराता रहूंगा हमेशा।
