मैं बरखा की बूँदों सा बादलों में रहता हूँ,

पवन के झोकों में मैं मेघों की भांति बहता हूँ,

डैनों को अपने फैलाए नभ पर मैं विचरता हूँ,

मैं पिंजरे का पंछी नहीं आसमान की चिड़िया हूँ | 


मैं जब जी चाहे सोता हूँ जब जी चाहे उठता हूँ,

घोंसले को संयम से तिनका-तिनका संजोता हूँ,

धन की ख़ातिर ना सुन्दर लम्हों की ख़ातिर जीता हूँ,

मैं पिंजरे का पंछी नहीं आसमान की चिड़िया हूँ | 


पैरों में मेरे बेड़ी है पंखों पर कतरन के निशान,

जीवन में मेरे बाकी बस – बंदिश लाचारी और अपमान,

पिंजरे में कैद बेबस मैं सपना एकल बुनता हूँ,

मैं पिंजरे का पंछी नहीं आसमान की चिड़िया हूँ ||