लब पर तेरे मेरा नाम नहीं आता है,

जो मैं पुकारूँ फिर भी तेरा पैगाम नहीं आता है,

जग के समक्ष मुझको तू जब-जब बदनाम करती है,

जानता हूँ दिल-ही-दिल में आह भरती है,

दस्तूर दुनिया का बदल सकते नहीं हैं हम,

इक-दूजे संग चाहकर भी जी सकते नहीं हैं हम ||