जो तुम समझो, महसूस करो तो क्या बात है

है ये उलझन तुमहरी भी, मगर मेरी भी समझो तो क्या बात है

क्या हो तुम क्या हूं में ये समझो तुम तो क्या बात है

जहां हूं में खड़ा, उसी पग पर खड़ी होकर जो तुम देखो तो क्या बात है

मेरे मन को, अपने मन में, अपने मन से रखकर जो तुम देखो तो क्या बात है।।।