तन्हाई
आज अचानक देखा मैंने
अपने दिल को गहराई से
चौंक गया मैं देखके उसके
अन्दर पलती तन्हाई से
अपनी किस्मत से मांगा था
इक तोहफा मैंने अपने लिए
दे गई वो तन्हाई मुझको
देखो कितनी चतुराई से
अब तो ये तन्हाई हर पल
उलझ रही मेरी यादों से
तंग आ गया हूँ मैं इनकी
इस हर दिन की लड़ाई से
लोग कहें तन्हाई देती है
मौका ख़ुद को परखने का
ख़ुदा बचाए मुझको ऐसी
बेमतलब की रानाई से
यादें, तन्हाई और बेचैनी
ये सब पाया है उल्फ़त में,
गुज़र ही जाएगा ये जीवन
मेरी इतनी बड़ी कमाई से
अंजाम मोहब्बत का 'मेहेर'
तन्हाई है ये जानके भी,
मैं नज़र चुराए फिरता हूँ
उल्फ़त की इस सच्चाई से
©️संतोष मेहेर

