नारी का सम्मान
चाहे उसको न सर पे चढ़ाओ
मत उसका गुणगान करो;
बस नारी की गरिमा पहचानो
और उसका सम्मान करो
बनाओ उज्जवल उसका कल,
प्रबल उसका वर्तमान करो;
खींच ले आओ तम से उसको,
रोशन उसके अरमान करो
उसके अहम को तूल न दो पर
दृढ़ उसका स्वाभिमान करो;
उसको उसके हिस्से का हक़ दो
न और कोई एहसान करो
मुश्किल न करो जीना उसका
भले न जीवन आसान करो;
बेशक उसकी न करो तारीफ़,
पर मत उसका अपमान करो
करना चाहो कुछ उसके लिए तो
बुलंद उसकी पहचान करो;
वो छूना चाहे जो आसमान
तो सशक्त उसकी उड़ान करो
उसका हर ग़म आधा कर दो,
दोगुनी उसकी मुस्कान करो;
दौलत से उसे कोई मोह नहीं,
उसे प्रेम-धन से धनवान करो
देखके उसकी गति प्रगति को
मत ख़ुद को हैरान करो;
उसके वुजूद से टकराकर
ख़ुद को मत पशेमान करो
वो अंश तुम्हारा, अक्स तुम्हारा
उसके होने का अभिमान करो;
वो ना हो तो तुम क्या हो -
इस बात पे थोड़ा ध्यान करो
आज तुम्हारे समक्ष खड़ी वो
अब समता का एलान करो;
स्वागत करो नए युग का,
नारी युग का आह्वान करो
स्वागत करो नए युग का,
नारी युग का आह्वान करो,
नारी की गरिमा पहचानो
और उसका सम्मान करो..
©️संतोष मेहेर

